(ननु जोगिंदर सिंह) पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी के रिसर्च स्कॉलर नीरज पंत और विजय ने कोविड-19 की टेस्टिंग के लिए वॉलंटियर्स तैयार करने हेतु अभियान चलाया था। इसमें देश भर से लगभग 400 रिसर्च स्कॉलर्स और साइंटिस्ट अब तक जुड़ चुके हैं। एक दिन पहले शुरू किए इस अभियान में 50 से अधिक रिसर्च स्कॉलर चंडीगढ़ से हैं। विजय फरवरी में ही वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी चाइना से लौटे हैं। डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलॉजी पहले ही अपनी लैब में टेस्ट करने का प्रस्ताव चंडीगढ़ प्रशासन को भेज चुका है। नीरज इस समय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) चंडीगढ़ के इंचार्ज हैं और इससे पहले वे अपनी एनजीओ ‘रियो’ के जरिए ‘हर हाथ तिरंगा बैंड’ और ‘शहीदों को नमन’ जैसे कई प्रोग्राम करवा चुके हैं। वे प्रो. प्रिंस शर्मा के पीएचडी स्टूडेंट हैं।
पीयू के अलावा अन्य कई इंस्टीट्यूट्स में भी इस तरह की लैब हैं
नीरज ने बताया कि कोविड-19 की टेस्टिंग के लिए जो भारतीय टेस्टिंग किट आई है, उसके जरिए किसी भी आरटी पीसीआर पर टेस्टिंग हो सकती है। पीयू के अलावा नाइपर, आइजर मोहाली और अन्य कई इंस्टीट्यूट्स में भी इस तरह की लैब हैं। यूनिवर्सिटी के पास तो हाई सिक्योरिटी लैब लेवल-2 भी हैं। रिसर्च स्कॉलर का मानना है कि सभी इंस्टीट्यूट की लैबरोट्री के उपकरणों को इस्तेमाल करके एक विशेष ले बनाई जा सकती है, जहां पर सारे टेस्ट किए जा सकते हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर मोबाइल लैब भी बनाई जा सकती हैं, ताकि सैंपल को लाने और लेकर जाने में खराब होने वाला समय बचाया जा सकें। ज्यादा से ज्यादा टेस्ट होंगे, तभी लोगों को क्वॉरेंटाइन करना संभव होगा। उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर भी लिखा है। नीरज ने बताया कि शहर के ज्यादातर इंस्टीट्यूट के निजी ग्रुप और रिसर्च स्कॉलर्स के जॉइंट ग्रुप में उन्होंने इसे शेयर किया था। यहीं से उनका मैसेज वायरल हुआ और पूरे देश से करीब 400 एमएससी पास स्टूडेंट्स, जूनियर रिसर्च फेलो, सीनियर रिसर्च फेलो और साइंटिस्ट 24 घंटे में फॉर्म भर चुके हैं। माइक्रोबायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी के अलावा बायो केमिस्ट्री, फॉरेंसिक साइंस, माइक्रो वियल बायोटेक्नोलॉजी और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के साइंटिस्ट्स को आसानी से कर सकते हैं।
पीयू में ही एक दिन में 100 टेस्ट हो सकेंगे
यदि सिर्फ पीयू में ही ही टेस्टिंग हो तो भी 1 दिन में 100 सैंपल चेक हो सकते हैं। यूनिवर्सिटी की एक बार में 40 से अधिक सैंपल टेस्ट करने की क्षमता है। कोविड-19 के एक टेस्ट को करने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है। यदि सभी इंस्टीट्यूट में मौजूद उपकरणों का उपयोग किया जाए तो रोजाना हजारों सैंपल चेक करना संभव है। भारत में कम टेस्टिंग पर डब्ल्यूएचओ ने भी चिंता जताई है।
फायदा ये, ज्यादा टेस्ट होंगे..
आईसीएमआर, सीएसआईआर, डीबीटी और डीएसटी की ओर से उपलब्ध कराए गए सभी आरटी पीसीआर और एलिजा रीडर जैसे उपकरणों का उपयोग टेस्टिंग के लिए किया जा सकेगा। ये उपकरण लगभग देश के हर प्रतिष्ठित सरकारी यूनिवर्सिटी और साइंस संबंधित रिसर्च करने वाले इंस्टीट्यूट में मौजूद हैं। सरकार जिला स्तर पर इकट्ठा करके इनकी एक विशेष लैब किसी भी अस्पताल में बना सकती है, जहां पर ये रिसर्चर वाॅलंटियर के तौर पर काम करेंगे।
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