नगर निगम की ओर से शहर में टूटी सड़कों की रिपेयर के लिए एक रोड रिपेयर सैल का गठन किया गया है। जिसका काम शहर में घूम कर चैक करना है कि कहां-कहां पर गढ्ढ़े पड़े हैं और उसके बाद उन गड्ढों को साथ के साथ रिपेयर करना है। लेकिन निगम की टीम में एक ट्रेक्टर-ट्राली का ड्राइवर तथा तीन लेबर कर्मी हैं जो कि
शहर में टूटी सड़कों की रिपेयर का काम करते हैं।
शनिवार को भी टीम की ओर से सड़कों के गढ्ढ़े भरने का काम किया जा रहा था। इस दौरान इंस्ट्रीयल एरिया फेज-8 एयरपोर्ट रोड चौराहे से स्पाई चौक की ओर आने वाले मार्ग पर टीम की ओर से सड़कों के गढ्ढ़े भरे जा रहे थे। लेकिन टीम की ओर से जिस प्रकार से काम किया जा रहा है वो बिलकुल गलत है। जिस कारण ज्यादा समय तक इन गड्ढों में प्रि-मिक्स टिक नहीं पाएगी और दोबारा से सड़कों पर गढ्ढ़े पड़ जाएंगे।
बिना लेवलिंग के सड़कों पर डाली जा रही प्रि-मिक्स
नगर निगम की इस टीम की ओर से सड़कों के गड्ढों पर जहां पर प्रि-मिक्स डाली जा रही है, वहां पर ना तो
पहले गड्ढों में से मिट्टी निकाली जाती है और ना ही वहां पर पहले लुक
का पेंट किया जाता है। जबकि
सीधा ही रेडीमेड प्रि-मिक्स इन गड्ढों में डाल दी जाती है। जो प्रि-मिक्स भी डाली जाती है उसे ना तो लेवल
किया जाता है और ना डालने के बाद कंप्रैस किया जाता है। सीधा प्रि-मिक्स गड्ढों में फेंककर टीम वहां से आगे चलते बनती है।
ज्यादा देर तक नहीं टिक पाएगी लाखों की प्रि-मिक्स
इस बारे में जानकारी देते हुए एक्सपर्ट इंजीनियर एनएस कलसी ने बताया कि निगम की रोड रिपेयर टीम जिस प्रकार से बिना टेक्नीकल सुपरविजन के काम कर रही है वो सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि टीम की ओर से गढ्ढ़े भरने के लिए रेडीमेड प्रि-मिक्स इस्तेमाल की जा रही है वो काफी महंगी आती है लेकिन जिस प्रकार से बिना टेक्नीकल सुपरविजन के टीम गड्ढो में प्रि-मिक्स डाल रही है वो ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएगी और टैक्स पेयर के पैसे की बर्बादी होगी।
उन्होंने कहा कि निगम अधिकारियों को चाहिए कि वो जेई या एसडीओ की जिम्मेवारी तय करें कि वो अपनी हाजरी में ही नियमों के अनुसार सड़कों के गढ्ढ़े भरने का काम करवाएं ताकि सही तरीके से नियमों के साथ और पक्का काम हो सके।
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