चंडीगढ़.कोरोना वायरस ने लोगों की जिंदगी को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। 36 साल पहले 1984 में आतंकवाद के समय शहर के लोगों ने कर्फ्यू की मार खूब झेली थी। इतने साल बाद जब हालात सुधर चुके हैं तो अब इस महामारी ने लोगों को फिर से कर्फ्यू वाले दिन दिखा दिया है। पंजाब में सोमवार से कर्फ्यू लगा और चंडीगढ़ में मंगलवार को। कर्फ्यू के पहले दिन लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जरूरत की चीजों के लिए भी परेशान होना पड़ा।
32 साल में पहली बार देखा कर्फ्यू, अपना घर होने के बाद भी होटल में गुजारी रात
कर्फ्यू में वे लोग भी परेशान हुए, जो कर्फ्यू से पहले घर से बाहर थे। इन्हें अपने ही घर आने के लिए धक्के खाने पड़े। रामदरबार के 32 साल के प्रीतम सिंह के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। वे सोमवार को अपने किसी दोस्त से मिलने के लिए सेक्टर-45 गए थे। वहां टाइम ज्यादा हो गया और इतने में 12 बजे के बाद कर्फ्यू लग गया। जब घर वापस जाने लगे तो रास्ते में पुलिस ने रोक लिया। प्रीतम को शहर में अपना घर होने के बावजूद मजबूरी में होटल में रात बितानी पड़ी। जेब में 1200 रुपए थे और वे भी होटल और खाने-पीने में खर्च हो गए। होटल वाले ने सुबह रूम खाली करने के लिए कह दिया और पुलिस घर जाने नहीं दे रही थी। किसी तरह पुलिस से रिक्वेस्ट कर वे अपने घर पहुंच सके। प्रीतम ने कहा कि जिंदगी में पहली बार उसने कर्फ्यू का माहौला देखा।
गर्भवती पत्नी से दूर हुए मोहाली के हिमांशु
मोहाली के हिमांशु भी कर्फ्यू में फंसे। इस कारण उन्हें अपनी पत्नी से अलग रहना पड़ रहा है, जोकि इस समय प्रेग्नेंट है और अगले महीने उसकी डिलीवरी होनी है। हिमांशु ने बताया कि उनकी ससुराल चंडीगढ़ सेक्टर-37 में है और वे शनिवार से अपनी पत्नी के साथ ही वहीं रह रहे थे। सोमवार को हिमांशु अपने कपड़े और अन्य सामान लेने के लिए मोहाली गए। इतने में मोहाली प्रशासन ने जिले में कर्फ्यू की घोषणा कर दी। इस कारण पुलिस ने उन्हें चंडीगढ़ आने नहीं दिया। इस समय पत्नी के साथ रहना जरूरी है, लेकिन अब मजबूरी में उन्हें दूर रहना पड़ रहा है। पत्नी का चेकअप पंचकूला में हो रहा है। मुश्किल ये है कि उनके ससुराल में किसी के पास गाड़ी भी नहीं है। ऐसे में अगर अचानक कोई जरूरत पड़ी तो उनकी गैरमौजूदगी में दिक्कत हो सकती है।
कर्फ्यू ने पुराने दिन याद दिला दिए
सेक्टर-50 केरेजिडेंटप्रदीप भारद्वाज ने कहा कि मैंने अपनी लाइफ में पहले भी कर्फ्यू का माहौल देखा है। लेकिन तब आतंकवाद से दहशत का माहौल था और अब महामारी से। मैंने 1984 में भी कर्फ्यू देखा था और तब भी लोगों को बड़ी दिक्कतें हुई थीं। तब आतंकवादियों से डर लगता था और अब हमें अपने ही लोगों से डर लगता है।
तब कर्फ्यू में सख्ती बहुत ज्यादा होती थी
सेक्टर-22 निवासीसंजय ढल्ल बोले किहमने तो ऐसे दिन भी देखे हैं, जब कर्फ्यू में सड़कों पर निकलना तो दूर घर के बाहर खड़ा होना भी मुश्किल होता था। सड़कों पर पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्सेस बहुत ज्यादा रहती थी। अब तो अगर कोई बाहर मिल जाता है तो मामूली सजा देकर छोड़ दिया जाता है। लेकिन पहले तो लोगों से बहुत ज्यादा पूछताछ होती थी।
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