जीरकपुर नगर परिषद के वार्ड 2 में कई गरीब परिवारोंको सरकार की ओर से राशन नहीं मिला। यहां रहने वाले कई लोगोंकी सूची भी प्रशासन के पास पहुंची। पर यहां लोगोंकी शिकायत है कि 50 परिवार अगर बिना राशन के हैं तो 5 परिवारोंको ही राशन दिया गया। बाकी परिवारों की मदद नहीं की गई। प्रशासन की ओर से मदद न मिलने पर इन लेागोंने उन लोगों से मदद मांगी जो इस समय कुछ मदद करने की क्षमता रखते है। यहां के पूर्व पार्षद हवा सिंह अत्री ने कि यह समय राजनीति का नहीं है। प्रशासन ने मदद की या नहीं की। विजय भारद्वाज नाम के एक ट्रांसपोर्टर ने गरीब परिवारों के लिए 4 क्विंटल चावल, इनता ही आटा और दो क्विंटल दाल दी है। इससे सौ से ज्यादा परिवार कुछ दिन आराम से रोटी खा सकते है। इस तरह की मदद से लोगाे को बड़ी राहत मिली है।
लाॅकडाउन से दिहाड़ीदार कई परिवार मुश्किल में
इस एरिया में कई परिवार है जो रोजाना कमाकर रोटी खाते है। लॉकडाउन के बाद से इनकी हालत खराब हो गई। इसलिए इनके पास सरकारी राशन या समाजसेवी लेागोंकी मदद की ही उम्मीद है। सरकारी राशन भी कुछ लेागोंको मिला पर मददगार कई लोगोंने यहां लोगों की रेाटी का इंतजाम किया। इस समय हालत ऐसे हैं कि यहां किराए पर रहने वाले परिवारोंके सामने एक ओर अपने बच्चोंका पेट भरना मुश्किल हो रहा है। लॉकडाउन लंबा होने पर गरीब परिवारोंकी अपनी जेब का पैसा खत्म होने के साथ घरोंमेंराशन के डिब्बे भी खाली हो चुके हैं। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने इनकी मदद नहीं की गई तो कई परिवार घर के अंदर भूखे रह जाएंगे। लेागोंने अपने घरों के राशन के खाली डिब्बे दिखाकर कर कहा कि अगर उनको मदद नहीं मिली तो अपने ही घरोंमेंभूखे मर जाएंगे।
कामकाज ठप होने पर दिहाडीदार परिवाराें की बड़ी मुश्किल
पूरे शहर मेंहजारोंऐसे परिवार हैं जो किराए पर रहते हैं। किराए के साथ खाने के लिए रोजाना दिहाड़ी पर निर्भर इन परिवारोंका कहना है कि एक ओर काम बंद हो गए। राशन की दुकानें तो कहीं न कहीं खुल रही हैं पर उनकी जेब में एक ढेला तक नहीं है। ऐसे में राशन कहां से आएगा। ईट भटटोंपर काम करने वाले, दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूर, कारपेंटर और इस तरह अन्य काम कर गुजारा करने वालों के लिए अगले कुछ दिन बिना राशन के घरोंमेंरहना मुश्किल हो रहा है। लेाग रोजाना सुबह मेरे घर पहुंच जाते थे।
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