Thursday, April 2, 2020

चंडीगढ़: मरीजों को बचाने के लिए घर भी नहीं जा रहे डॉक्टर-नर्स, टारगेट-कोरोना को हराना है

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(मनोज अपरेजा)कोरोना से मरीजों को ठीक करने की जिम्मेदारी मेडिकल स्टाफ की है। डॉक्टर-नर्स मरीजों को बचाने में जुटे हुए हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो कई दिन से घर ही नहीं गए। जीएमसीएच-32 की स्टाफ नर्स रिबका मसीह भी 7 दिन से घर नहीं गई हैं। रिबका कहती हैं कि हम भी मरीजों की सेवा में क्वारेंटाइन हैं। ड्यूटी देने के बाद हमें हॉस्पिटल कैंपस में प्राइवेट रूम रखा जा रहा है। हिदायत है कि ड्यूटी के दौरान न ताे घर जाना है और न ही किसी से मिलना है। मैं इसे अपने पेशे का हिस्सा मानकर चल रही हूं।


रिबका ने कहा कि ईश्वर ने हमें मौका दिया है ऐसे लोगों की सेवा करने का, जाे खुद डरे हुए हैं। बीमारी ऐसी है कि मरीजों के पास जाते हुए डर लगता है, लेकिन उन मरीजों पर तरस भी आता है, जो हमारे ही भरोसे हैं। वार्ड में जाने से पहले ईश्वर से प्रेयर करती हूं कि सभी मरीज ठीक रहें।

26 मार्च से कर रही हूं ड्यूटी
रिबका मसीह 26 मार्च से आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रही हैं। रिबका इसे काम का हिस्सा मानती हैं। कहती हैं कि बीमारी का खौफ सबमें है। हम भी इंसान हैं, लेकिन जब वार्ड में पहुंच जाते हैं तो डर दूर हो जाता है। वार्ड में एडमिट हर मरीज को मैं मोटिवेट करती हूं कि आप डरें नहीं, आप ठीक हो जाएंगे। उनसे कहती हूं कि आप आइसोलेशन में घबराएं नहीं, हम तो आपके साथ हैं।

रिबका मसीह कहती हैं बेटी राेज फोन करती है, जल्दी आने की बात करती है।

पति कहते हैं-ऊपरवाले ने तुम्हें सेवा करने का मौका दिया है
मेरे पति संजीव एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका फोन आता है तो वे भी मुझे मोटिवेट करते हैं। कहते हैं ऊपरवाले ने तुम्हें एक मौका दिया है, ऐसे लोगों की सेवा करने का जो महामारी के शिकार हुए हैं। बिटिया 14 साल की है। 9वीं क्लास में बढ़ती है। वह भी रोज फोन करती है। नाराज हो जाती है। बच्ची छोटी है तो उसे डर लगता है। रोजाना जल्दी घर आने की बात कहती है। मैं उसे बस यही कहती हूं कि बेटा जल्द ही सब ठीक हो जाएगा।

हमसे ज्यादा घरवालों को डर लगता है, लेकिन ये तो सेवा है

8 दिन से घर नहीं गया। घरवाले चिंता में रहते हैं, लेकिन हौसला भी बढ़ाते हैं। हमें जो सेवा का मौका मिला है, इसे हम अपना सौभाग्य मान रहे हैं। यह कहना जीएमसीएच-32 के नर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डबकेश कुमार का। डबकेश कहते हैं कि मरीजों से 1 मीटर की दूरी बनाकर रखनी होती है, लेकिन ब्लड प्रेशर चेक करना होता है तो यह दूरी करना मुश्किल होता है।

डबकेश कहते हैं कि अब तो ठान लिया है कि कोरोना को हराकर ही दम लेंगे।

अब तो ठान लिया है कि कोरोना को खत्म करना है...

डबकेश कहते हैं कि जहां तक डर का सवाल है तो शुरू के दो-तीन दिन ड्यूटी के दौरान थोड़ा सा डर महसूस हुआ। अब तो ठान लिया है कि कोरोना को हराकर ही दम लेंगे। हर मुश्किल की घड़ी में हम सेवा के लिए तैयार हैं। कोरोना वार्ड में ड्यूटी करने वाला स्टाफ अपने घर नहीं जा सकता। सिर्फ फोन पर ही बात होती है। हम उन्हें भी यही कहते हैं कि आप घबराएं हम बिल्कुल ठीक हैं। जहां तक जीएमसीएच-32 के नर्सिंग स्टाफ का सवाल है तो हम सभी ने यह तय किया है कि हम डरेंगे नहीं, लड़ेंगे।



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प्रतीकात्मक फोटो।

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