चंडीगढ़.चंडीगढ़ में दुकानें खोलने के फैसले को जोरदार विरोध होने के बाद चंडीगढ़ प्रशासक वीपी सिंह बदनोर शनिवार को प्रशासन के सीनियर ऑफिसर्स के साथ टैगोर थिएटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने पहुंचे। बदनोर ने सफाई देते हुए कहा कि कर्फ्यू के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही थी। लोगों की जरूरत को देखते हुए दुकानें खोलने का फैसला लिया गया है। कर्फ्यू के दौरान ढील देने की जरूरत रहती है, इसलिए राशन की दुकानों और मेडिकल स्टोर्स को सुबह 10 से 6 बजे तक खोलने का फैसला लिया। बदनोर ने कहा कि फिलहाल दुकानें खोलने का फैसला शनिवार और रविवार के लिए ही था।
अब सोमवार को दुकानें खोली जाएंगी या बंद रहेंगी, इस पर सोमवार को फैसला होगा। प्रशासक ने कहा कि कोरोना के कारण जो हालात पैदा हुए हैं, वे काफी खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए लोगों को समझना चाहिए और सामाजिक दूरी बनाए रखनी चाहिए। हम समझते हैं कि लोगों को इन हालातों में परेशान होना पड़ रहा है। एक कोविड वॉर रूम बनाया है और इसी वॉर रूम के जरिए हर परिस्थितियों पर फैसले लिए जा रहे हैं।वहीं, शहर के ज्यादातर लोगों का कहना है कि दुकानें खोलने की इतनी जरूरत नहीं थी। कोरोना वायरस अभी खत्म थोड़ी हुआ है। शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर आए। इससे वायरस फैल सकता है।
दो महीने का एडवांस डीबीटी दिया जाएगा- डीसी
डीसी मंदीप बराड़ ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शुरू की गई डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत दो महीने का एडवांस दिया जा रहा है। उन्हें केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है और अब लोगों के खातों में दो महीने का एडवांस डीबीटी दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार से लगभग दो करोड़ रुपए की ग्रांट भी मिल चुकी है।
‘लाट साब’ की सफाई सिर्फ पूंजीपति ही दुकानें खोलने का कर रहे विरोध
वाहवाही लूटने के लिए बेशक प्रशासक वीपीसिंह बदनोर ने यह कह दिया कि पूंजीपति दुकानें खुलने का विरोध कर रहे हैं, लेकिन गरीब नहीं। लेकिन सच ये है कि पूंजीपति इसका ज्यादा मजा ले रहे हैं। अब ‘लाट साब’ से कौन पूछने की हिमाकत करे कि सेक्टर-1 से लेकर सेक्टर-22 तक कोई भी शख्स गरीबी रेखा से नीचे का नहीं रहता। न ही इन एरिया में कोई स्लम कॉलोनी और न ईडब्ल्यूएस कॉलोनी। बावजूद इसके इन सेक्टरों में ‘लाट साब’ मेहरबान हो गए और इन सेक्टरों में भी दुकानें खोलने की ढील दे दी। सेक्टर-50,51, सेक्टर-23, सेक्टर-27,28 33, 34, 35, 36 में भी कोई ईडब्ल्यूएस कॉलोनी या स्लम एरिया नहीं है, बावजूद इसके यहां भी दुकानें खोलने की छूट दी गई।
भास्कर सवाल- इन्हें मदद अभी चाहिए, बाद में इसका क्या करेंगे?
जरूरत तो अब है, बाद में दो महीने के एडवांस का जरूरतमंद लोग क्या करेंगे। क्योंकि बाहर से यहां मजदूरी के लिए आए लोग वापस अपने घर जा रहे हैं। क्योंकि राशन महंगा मिल रहा है। जहां किराए पर रहते हैं, वहां मकान मालिकों ने पैसे मांगने शुरू कर दिए हैं। ऐसी हालत में इन्हें तुुरंत मदद चाहिए न कि आश्वासन।
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